Faiz Ahmed Faiz – Geet hum tere paas aaye
गीत-हम तेरे पास आये फ़िल्म : सुख का सपना हम तेरे पास आये सारे भरम मिटा कर सब चाहतें भुला
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गीत-हम तेरे पास आये फ़िल्म : सुख का सपना हम तेरे पास आये सारे भरम मिटा कर सब चाहतें भुला
Read Moreएक गीत दर्द के नाम ऐ हमारी सारी रातों को दर्द देने वाले और दिल जलाने वाले ऐ हमारी अंखड़ियों
Read Moreदान वासन्ती की गोद में तरुण, सोहता स्वस्थ-मुख बालारुण; चुम्बित, सस्मित, कुंचित, कोमल तरुणियों सदृश किरणें चंचल; किसलयों के अधर
Read Moreप्रेयसी घेर अंग-अंग को लहरी तरंग वह प्रथम तारुण्य की, ज्योतिर्मयि-लता-सी हुई मैं तत्काल घेर निज तरु-तन। खिले नव पुष्प
Read Moreमुनीज़ा की सालगिरह इक मुनीज़ा हमारी बेटी है जो बहुत ही प्यारी बेटी है हम ही कब उसको प्यार करते
Read Moreमधुर स्वर तुमने बुलाया मधुर स्वर तुमने बुलाया, छद्म से जो मरण आया। बो गई विष वायु पच्छिम, मेघ के
Read Moreगवना न करा गवना न करा। खाली पैरों रास्ता न चला। कंकरीली राहें न कटेंगी, बेपर की बातें न पटेंगी,
Read Moreराही और बाँसुरी राही सूखी लकड़ी! क्यों पड़ी राह में यों रह-रह चिल्लाती है? सुर से बरसा कर आग राहियों
Read Moreवीर-वन्दना (1) वीर-वन्दना की वेला है, कहो, कहो क्या गाऊं ? आँसू पातक बनें नींव की ईंट अगर दिखलाऊं ।
Read Moreसंजीवन-घन दो जो त्रिकाल-कूजित संगम है, वह जीवन-क्षण दो, मन-मन मिलते जहाँ देवता! वह विशाल मन दो। माँग रहा जनगण
Read Moreगीत-कोई दीप जलाओ बुझ गया चंदा, लुट गया घरवा, बाती बुझ गई रे दैया राह दिखाओ मोरी बाती बुझ गई
Read Moreद्वन्द्व गीत रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वन्द्व गीत (१) चाहे जो भी फसल उगा ले, तू जलधार बहाता चल। जिसका भी
Read Moreमेरे देस के नौनिहालों के नाम वो गुंचे जो शबनम की इक बून्द खिलखिलाने की उम्मीद लेकर हमेशा तरसते रहे
Read Moreविपक्षिणी (एक रमणी के प्रति जो बहस करना छोड़कर चुप हो रही) क्षमा करो मोहिनी विपक्षिणी! अब यह शत्रु तुम्हारा
Read Moreनई आवाज कभी की जा चुकीं नीचे यहाँ की वेदनाएँ, नए स्वर के लिए तू क्या गगन को छानता है?
Read Moreकैसे हुई हार तेरी निराकार कैसे हुई हार तेरी निराकार, गगन के तारकों बन्द हैं कुल द्वार? दुर्ग दुर्घर्ष यह
Read Moreतुम आये, कनकाचल छाये तुम आये, कनकाचल छाये, ऐ नव-नव किसलय फैलाये। शतशत वल्लरियाँ नत-मस्तक, झुककर पुष्पाधर मुसकाये। परिणय अगणन
Read Moreजयप्रकाश झंझा सोई, तूफान रुका, प्लावन जा रहा कगारों में; जीवित है सबका तेज किन्तु, अब भी तेरे हुंकारों में।
Read Moreस्वर्ग के दीपक [उनके लिए जो हमारी कतार में आने से इनकार करते हैं] कहता हूँ, मौसिम फिरा, सितारो !
Read Moreगोपाल का चुम्बन छिः, छिः, लज्जा-शरम नाम को भी न गई रह हाय, औचक चूम लिया मुख जब मैं दूह
Read Moreगर हिम्मत है तो बिस्मिल्लाह कैसे मुमकिन है यार मेरे मजनूँ तो बनो लेकिन तुमसे इक संग न रस्मो-राह करे
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