Suryakant Tripathi Nirala – Unse sansaar bhav vaibhav dwaar
उनसे-संसार, भव-वैभव-द्वार उनसे-संसार, भव-वैभव-द्वार। समझो वर निर्जर रण; करो बार बार स्मरण, निराकार करण-हरण, शरण, मरणपार। रवि की छवि के
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उनसे-संसार, भव-वैभव-द्वार उनसे-संसार, भव-वैभव-द्वार। समझो वर निर्जर रण; करो बार बार स्मरण, निराकार करण-हरण, शरण, मरणपार। रवि की छवि के
Read Moreप्रलाप वीणानिन्दित वाणी बोल! संशय-अन्धकामय पथ पर भूला प्रियतम तेरा– सुधाकर-विमल धवल मुख खोल! प्रिये, आकाश प्रकाशित करके, शुष्ककण्ठ कण्टकमय
Read Moreनात (फ़ारसी रचना)”> ऐ तू कि हसत हर दिले-महज़ूं सराए तू आवुरदा-अम सराये दिगर अज़ बराए तू।1। ख़्वाजा ब-तख़्ते-बन्दा-ए-तशवीशे-मुलको-माल बर
Read Moreहम तो मजबूर-ए-वफ़ा हैं तुझको कितनों का लहू चाहिए ऐ अरज़े-वतन जो तिरे आरिज़े-बेरंग को गुलनार करें कितनी आहों से
Read Moreये मातम-ए-वक़्त की घड़ी है ठहर गई आसमां की नदिया वो जा लगी है उफ़क किनारे उदास रंगों की चांद
Read Moreमंज़र आसमां आज इक बहरे-पुरशोर है जिसमें हर सू रवां बादलों के जहाज़ उनके अरशे पे किरनों के मसतूल हैं
Read Moreसेहरा सजायो बज़्म दरे-मयकदा कुशादा करो उठायो साज़े-तरब, एहतमामे-बादा करो जलायो चांद सितारे, चिराग़ काफ़ी नहीं येह शब है जशन
Read Moreफूल अवनी के नक्षत्र! प्रकृति के उज्ज्वल मुक्ताहार! उपवन-दीप! दिवा के जुगनू! वन के दृग सुकुमार! मेरी मृदु कल्पना-लहर-से पुलकाकुल,
Read Moreकवि नवल उर में भर विपुल उमंग, विहँस कल्पना-कुमारी-संग, मधुरिमा से कर निज शृंगार, स्वर्ग के आँगन में सुकुमार !
Read Moreदिल्ली क्या यह वही देश है— भीमार्जुन आदि का कीर्ति क्षेत्र, चिरकुमार भीष्म की पताका ब्रह्माचर्य-दीप्त उड़ती है आज भी
Read Moreखेलूंगी कभी न होली खेलूंगी कभी न होली उससे नहीं जो हमजोली। यहां आंख कहीं कुछ बोली यह हुई श्याम
Read Moreकहाँ देश है (१) ‘अभी और है कितनी दूर तुम्हारा प्यारा देश?’– कभी पूछता हूँ तो तुम हँसती हो प्रिय,
Read Moreलायो तो कत्लनामा मिरा सुनने को भीड़ है सरे-महशर लगी हुई तोहमत तुम्हारे इश्क की हम पर लगी हुई रिन्दों
Read Moreतपी आतप से जो सित गात तपी आतप से जो सित गात, गगन गरजे घन, विद्युत पात। पलटकर अपना पहला
Read Moreज्येष्ठ (१) ज्येष्ठ! क्रूरता-कर्कशता के ज्येष्ठ! सृष्टि के आदि! वर्ष के उज्जवल प्रथम प्रकाश! अन्त! सृष्टि के जीवन के हे
Read Moreशोपेन का नग़मा बजता है छलनी है अंधेरे का सीना, बरखा के भाले बरसे हैं दीवारों के आंसू हैं रवां,
Read Moreफूल मुर्झा गये हैं सारे फूल मुर्झा गये हैं सारे थमते नहीं हैं आसमां के आंसू शमएं बेनूर हो गई
Read Moreनज्र तरबज़ारे-तख़य्युल शौके-रंगीकार की दुनिया मिरे अफ़कार की जन्नत, मिरे अशआर की दुनिया शबे-महताब की सहर आफ़रीं मदहोश मौसीकी तुम्हारी
Read Moreरेखा यौवन के तीर पर प्रथम था आया जब श्रोत सौन्दर्य का, वीचियों में कलरव सुख चुम्बित प्रणय का था
Read Moreआवेदन (गीत) फिर सवाँर सितार लो! बाँध कर फिर ठाट, अपने अंक पर झंकार दो! शब्द के कलि-कल खुलें, गति-पवन-भर
Read Moreपरदेशी माया के मोहक वन की क्या कहूँ कहानी परदेशी? भय है, सुन कर हँस दोगे मेरी नादानी परदेशी! सृजन-बीच
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