Ramdhari Singh Dinkar – Poorvabhaas
पूर्वाभास हाय ! विभव के उस पद में नियति-भीषिका की मुसकान जान न सकी भोग में भूली- सी तेरी प्यारी
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पूर्वाभास हाय ! विभव के उस पद में नियति-भीषिका की मुसकान जान न सकी भोग में भूली- सी तेरी प्यारी
Read Moreतेरी सूरत जो दिलनशीं की है तेरी सूरत जो दिलनशीं की है आशन: शक्ल हर हँसी की है हुस्न से
Read Moreतुम आए हो न शबे-इन्तिज़ार गुज़री है तुम आए हो न शबे-इन्तिज़ार गुज़री है तलाश में है सहर बार-बार गुज़री
Read Moreपेरिस दिन ढला, कूचा-ओ-बाज़ार में सफ़बसता हुई ज़र्द-रू रौशनियां इनमें हर एक के कशकोल से बरसें रिम-झिम इस भरे शहर
Read Moreकव्वाली जला फिर सबर का ख़िरमन, फिर आहों का धुआं उट्ठा हुआ फिर नज़रे-सरसर हर नशेमन का हर इक तिनका
Read Moreक्या करें मिरी तिरी निगाह में जो लाख इंतज़ार हैं जो मेरे तेरे तन बदन में लाख दिल फ़िगार हैं
Read Moreफ़लिसतीन के लिए -१ (फ़लिसतीनी शुहुदा जो परदेस में काम आये) मै जहां पर भी गया अरज़े-वतन तेरी तज़लील के
Read Moreफ़लिसतीन के लिए-२ (फ़लिसतीनी बच्चों के लिए लोरी) मत रो बच्चे रो रो के अभी तेरे अंमी की आंख लगी
Read Moreमेरे मिलनेवाले वो दर खुला मेरे ग़मकदे का वो आ गये मेरे मिलनेवाले वा आ गई शाम, अपनी राहों में
Read Moreगांव की सड़क ये देस मुख़लिसी-नादार कजकुलाहों का ये देस बेज़र-ओ-दीनार बादशाहों का कि जिसकी ख़ाक में कुदरत है कीमीयाई
Read Moreगीत जलने लगीं यादों की चिताएं आयो कोई बैत बनायें जिनकी रह तकते जुग बीते चाहे वो आयें या नहीं
Read MoreAshaar-o-Qataat Faiz Ahmed Faiz १ रात यूं दिल में तिरी खोई हुई याद आई जैसे वीराने में चुपके से बहार
Read Moreरब्बा सच्चिआ रब्बा सच्चिआ तूं ते आख्या सी जाह ओए बन्दिया जग दा शाह हैं तूं साडियां नेहमतां तेरियां दौलतां
Read Moreमेरी डोली शौह दरिया (१९७४ दे हढ़-पीड़तां दे सहायता-कोश दे लई रची गई) कल्ल्ह तांईं सानूं बाबला तूं रक्ख्या हिक्क
Read Moreगीत किधरे ना पैंदियां दस्सां वे परदेसिया तेरियां काग उडावां शगन मनावां वगदी वा दे तरले पावां तेरी याद आवे
Read Moreहमारे कृषक जेठ हो कि हो पूस, हमारे कृषकों को आराम नहीं है छूटे कभी संग बैलों का ऐसा कोई
Read Moreविजयी के सदृश जियो रे वैराग्य छोड़ बाँहों की विभा संभालो चट्टानों की छाती से दूध निकालो है रुकी जहाँ
Read Moreइक तराना पंजाबी किसान दे लई उट्ठ उतांह नूं जट्टा मर्दा क्युं जानैं भुल्या, तूं जग दा अन्नदाता तेरी बांदी
Read Moreकलम या कि तलवार दो में से क्या तुम्हे चाहिए कलम या कि तलवार मन में ऊँचे भाव कि तन
Read Moreराजा वसन्त वर्षा ऋतुओं की रानी राजा वसन्त वर्षा ऋतुओं की रानी लेकिन दोनों की कितनी भिन्न कहानी राजा के
Read Moreलंमी रात सी दर्द फ़िराकवाली लंमी रात सी दर्द फ़िराकवाली तेरे कौल ते असां वसाह करके कौड़ा घुट्ट कीती मिट्ठड़े
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