Ramdhari Singh Dinkar – Shakti aur kshamaa
शक्ति और क्षमा क्षमा, दया, तप, त्याग, मनोबल सबका लिया सहारा पर नर व्याघ्र सुयोधन तुमसे कहो, कहाँ, कब हारा?
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शक्ति और क्षमा क्षमा, दया, तप, त्याग, मनोबल सबका लिया सहारा पर नर व्याघ्र सुयोधन तुमसे कहो, कहाँ, कब हारा?
Read Moreकता अज्ज रात इक रात दी रात जी के असां जुग हज़ारां जी लिता ए अज्ज रात अंमृत दे जाम
Read Moreइक गीत देश-छड्ड के जान वाल्यां लई “वतने दियां ठंडियां छाईं ओ यार टिक रहु थाईं ओ यार” रोज़ी देवेगा
Read Moreमैं तेरे सपने देखूं बरख़ा बरसे छत्त पर, मैं तेरे सपने देखूं बर्फ़ गिरे परबत पर, मैं तेरे सपने देखूं
Read Moreभाई आज से बारह बरस पहले बड़ा भाई मिरा सतालिनगराद की जंगाह में काम आया था मेरी मां अब भी
Read Moreदाग़िसतानी ख़ातून और शायर बेटा उसने जब बोलना न सीखा था उसकी हर बात मैं समझती थी अब वो शायर
Read Moreब-नोके-शमशीर मेरे आबा के थे नामहरमे-तौको-ज़ंजीर वो मज़ामी जो अदा करता है अब मेरा कल्म नोके-शमशीर पे लिखते थे ब-नोके-शमशीर
Read Moreआरज़ू मुझे मोजज़ों पे यकीं नहीं मगर आरज़ू है कि जब कज़ा मुझे बज़्मे-दहर से ले चले तो फिर एक
Read Moreसालगिरह शहर का जशने-सालगिरह है, शराब ला मनसब ख़िताब रुतबा उनहें क्या नहीं मिला बस नुकस है तो इतना कि
Read Moreएक चट्टान के लिए कतबा जवांमर्दी उसी रिफ़अत पे पहुंची जहां से बुज़दिली ने जस्त की थी (कतबा=कब्र पर लगी
Read Moreतीरगी जाल है तीरगी जाल है और भाला है नूर इक शिकारी है दिन, इक शिकारी है रात जग समन्दर
Read Moreनुसखा-ए-उलफ़त मेरा गर किसी तौर हर इक उलफ़ते-जानां का ख़्याल शे’र में ढल के सना-ए-रुख़े-जानाना बने फिर तो यूं हो
Read Moreफ़ंड के लिए सिफ़ारिस फ़ंडवालों से गुज़ारिश है कि कुछ सदका-ए-ज़र सायले-मुहव्वल-ए-बाला को मिले बारे-दिगर पोच लिखते हैं जो वो
Read Moreमनुष्यता है बहुत बरसी धरित्री पर अमृत की धार; पर नहीं अब तक सुशीतल हो सका संसार । भोग लिप्सा
Read Moreहमने देखा है हमने देखा है मयगुसारों को पी के और जी के अख़िरश मरते जो नहीं पीते मौत को
Read Moreकौन फिर तुझको बरेगा कौन फिर तुझको बरेगा तू न जब उस पथ मरेगा? निखिल के शर शत्रु हनकर, क्षत
Read Moreअन्तर्वासिनी अधखिले पद्म पर मौन खड़ी तुम कौन प्राण के सर में री? भीगने नहीं देती पद की अरुणिमा सुनील
Read Moreतू दिगम्बर विश्व है घर तू दिगम्बर विश्व है घर ज्ञान तेरा सहज वर कर। शोकसारण करणकारण, तरणतारण विष्णु-शंकर। अमित
Read Moreअगेय की ओर गायक, गान, गेय से आगे मैं अगेय स्वन का श्रोता मन। सुनना श्रवण चाहते अब तक भेद
Read Moreमर्दे-दाना मर्दे-दाना पी के अहमक से कभी बदतर हुआ और कभी बरअक़्स इसके हुआ, अक़्सर हुआ (मर्दे-दाना=बुद्धिमान आदमी, बरअक्स=उलट)
Read Moreखोले अमलिन जिस दिन खोले अमलिन जिस दिन, नयन विश्वजन के दिखी भारती की छबि, बिके लोग धन के। तन
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