Hindi Poetry

Faiz Ahmed Faiz – Saalgiraah


सालगिरह

शहर का जशने-सालगिरह है, शराब ला
मनसब ख़िताब रुतबा उनहें क्या नहीं मिला
बस नुकस है तो इतना कि मसदूह ने कोई
मिसरा कोई किताब के शायां नहीं लिखा

(मसदूह=जिसकी तारीफ़ की गई हो, शायां=योग्य)