Hindi Poetry Faiz Ahmed Faiz – Saalgiraah June 12, 2022 rhymecloud सालगिरह शहर का जशने-सालगिरह है, शराब ला मनसब ख़िताब रुतबा उनहें क्या नहीं मिला बस नुकस है तो इतना कि मसदूह ने कोई मिसरा कोई किताब के शायां नहीं लिखा (मसदूह=जिसकी तारीफ़ की गई हो, शायां=योग्य)