Faiz Ahmed Faiz – Ijje ahle-sitam ki baat kro
इज्ज़े अहले-सितम की बात करो इज्ज़े अहले-सितम की बात करो इश्क़ के दम-क़दम की बात करो बज़्मे-अहले-तरब से शरमाओ बज़्मे-असहाबे-ग़म
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इज्ज़े अहले-सितम की बात करो इज्ज़े अहले-सितम की बात करो इश्क़ के दम-क़दम की बात करो बज़्मे-अहले-तरब से शरमाओ बज़्मे-असहाबे-ग़म
Read Moreलेनिनगराड का गोरिसतान सर्द सिलों पर ज़रद सिलों पर ताज़ा गरम लहू की सूरत गुलदस्तों के छींटे हैं कतबे सब
Read Moreगरानी-ए-शबे-हिज्राँ दुचंद क्या करते गरानी-ए-शबे-हिज्राँ दुचंद क्या करते इलाजे-दर्द तेरे दर्दमंद क्या करते वहीं लगी है जो नाज़ुक मकाम थे
Read Moreस्वर्ण घन उठो, क्षितिज-तट छोड़ गगन में कनक-वरण घन हे! बरसो, बरसो, भरें रंग से निखिल प्राण-मन हे! भींगे भुवन
Read Moreअमा-संध्या नीरव, प्रशान्त जग, तिमिर गहन। रुनझुन रुनझुन किसका शिंजन? किसकी किंकिणि-ध्वनि? मौन विश्व में झनक उठा किसका कंकण? झिल्ली-स्वन?
Read Moreविश्व-छवि मैं तुझे रोकता हूँ पल-पल, तू और खिंचा-सा जाता है, मन, जिसे समझता तू सुन्दर, उस जग से कब
Read Moreकुछ इश्क किया कुछ काम किया वो लोग बहुत ख़ुश-किस्मत थे जो इश्क को काम समझते थे या काम से
Read Moreदर-ए-उमीद के दरयूज़ागर फिर फरेरे बन के मेरे तन-बदन की धज्जीयां शहर के दीवारो-दर को रंग पहनाने लगीं फिर कफ़-आलूदा
Read Moreआज इक हरफ़ को फिर ੧ आज इक हरफ़ को फिर ढूंढता फिरता है ख़्याल मध-भरा हरफ़ कोई ज़हर-भरा हरफ़
Read Moreआए कुछ अब्र कुछ शराब आए आए कुछ अब्र कुछ शराब आए उस के बाद आए जो अज़ाब आए बामे-मीना
Read Moreहसरते दीद में गुज़राँ है ज़माने कब से हसरते दीद में गुज़राँ है ज़माने कब से दशते-उमीद में गरदां हैं
Read Moreपावस-गीत अम्बर के गृह गान रे, घन-पाहुन आये। इन्द्रधनुष मेचक-रुचि-हारी, पीत वर्ण दामिनि-द्युति न्यारी, प्रिय की छवि पहचान रे, नीलम
Read Moreपरियों का गीत-1 हम गीतों के प्राण सघन, छूम छनन छन, छूम छनन । बजा व्योम वीणा के तार, भरती
Read Moreरहस्य तुम समझोगे बात हमारी? उडु-पुंजों के कुंज सघन में, भूल गया मैं पन्थ गगन में, जगे-जगे, आकुल पलकों में
Read Moreपतित हुआ हूँ भव से तार पतित हुआ हूँ भव से तार; दुस्तर दव से कर उद्धार। तू इंगित से
Read Moreपतित पावनी, गंगे पतित पावनी, गंगे! निर्मल-जल-कल-रंगे! कनकाचल-विमल-धुली, शत-जनपद-प्रगद-खुली, मदन-मद न कभी तुली लता-वारि-भ्रू-भंगे! सुर-नर-मुनि-असुर-प्रसर स्तव रव-बहु गीत-विहर जल धारा
Read Moreपरियों का गीत-2 फूलों की नाव बहाओ री,यह रात रुपहली आई । फूटी सुधा-सलिल की धारा डूबा नभ का कूल
Read Moreसंबल सोच रहा, कुछ गा न रहा मैं। निज सागर को थाह रहा हूँ, खोज गीत में राह रहा हूँ,
Read Moreचरण गहे थे, मौन रहे थे चरण गहे थे, मौन रहे थे, विनय-वचन बहु-रचन कहे थे। भक्ति-आंसुओं पद पखार कर,
Read Moreविपद-भय-निवारण करेगा वही सुन विपद-भय-निवारण करेगा वही सुन, उसी का ज्ञान है, ध्यान है मान-गुन। वेग चल, वेग चल, आयु
Read Moreवर्षा-गान दूर देश के अतिथि व्योम में छाए घन काले सजनी, अंग-अंग पुलकित वसुधा के शीतल, हरियाले सजनी! भींग रहीं
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