Ramdhari Singh Dinkar – Pranti 1
प्रणति-1 कलम, आज उनकी जय बोल जला अस्थियाँ बारी-बारी छिटकाई जिनने चिंगारी, जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर लिए बिना गर्दन
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प्रणति-1 कलम, आज उनकी जय बोल जला अस्थियाँ बारी-बारी छिटकाई जिनने चिंगारी, जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर लिए बिना गर्दन
Read Moreतुलसीदास (1) भारत के नभ के प्रभापूर्य शीतलाच्छाय सांस्कृतिक सूर्य अस्तमित आज रे-तमस्तूर्य दिङ्मण्डल; उर के आसन पर शिरस्त्राण शासन
Read Moreचुम्बन लहर रही शशिकिरण चूम निर्मल यमुनाजल, चूम सरित की सलिल राशि खिल रहे कुमुद दल कुमुदों के स्मिति-मन्द खुले
Read Moreसच है यह सच है:- तुमने जो दिया दान दान वह, हिन्दी के हित का अभिमान वह, जनता का जन-ताका
Read Moreगीत जैसे हम हैं वैसे ही रहें, लिये हाथ एक दूसरे का अतिशय सुख के सागर में बहें। मुदें पलक,
Read Moreप्रेम का सौदा सत्य का जिसके हृदय में प्यार हो, एक पथ, बलि के लिए तैयार हो । फूँक दे
Read Moreकविता की पुकार आज न उडु के नील-कुंज में स्वप्न खोजने जाऊँगी, आज चमेली में न चंद्र-किरणों से चित्र बनाऊँगी।
Read Moreहिमालय मेरे नगपति! मेरे विशाल! साकार, दिव्य, गौरव विराट्, पौरूष के पुन्जीभूत ज्वाल! मेरी जननी के हिम-किरीट! मेरे भारत के
Read Moreहिंदुस्तान में दो दो हिंदुस्तान दिखाई देते हैं हिंदुस्तान में दो दो हिंदुस्तान दिखाई देते हैं एक है जिसका सर
Read Moreचलो ना भटके चलो ना भटके लफ़ंगे कूचों में लुच्ची गलियों के चौक देखें सुना है वो लोग चूस कर
Read Moreमैं अपने घर में ही अजनबी हो गया हूँ आ कर मैं अपने घर में ही अजनबी हो गया हूँ
Read Moreक़ब्रें कैसे चुपचाप मर जाते हैं कुछ लोग यहाँ जिस्म की ठंडी सी तारीक सियाह कब्र के अंदर! न किसी
Read Moreक़दम उसी मोड़ पर जमे हैं क़दम उसी मोड़ पर जमे हैं नज़र समेटे हुए खड़ा हूँ जुनूँ ये मजबूर
Read Moreक़र्ज़ इतनी मोहलत कहाँ कि घुटनों से सिर उठाकर फ़लक को देख सको अपने तुकडे उठाओ दाँतो से ज़र्रा-ज़र्रा कुरेदते
Read Moreइक जरा छींक ही दो तुम चिपचिपे दूध से नहलाते हैं, आंगन में खड़ा कर के तुम्हें शहद भी, तेल
Read Moreतन्हा कहाँ छुपा दी है रात तूने कहाँ छुपाये है तूने अपने गुलाबी हाथों के ठन्डे फाये कहाँ है तेरे
Read Moreमौत तू एक कविता है मौत तू एक कविता है मुझसे एक कविता का वादा है मिलेगी मुझको डूबती नब्ज़ों
Read Moreपतझड़ जब जब पतझड़ में पेड़ों से पीले पीले पत्ते मेरे लॉन में आकर गिरते हैं रात को छत पर
Read Moreरात भर सर्द हवा चलती रही रात भर सर्द हवा चलती रही रात भर हमने अलाव तापा मैंने माजी से
Read Moreबोस्की-१ बोस्की ब्याहने का समय अब करीब आने लगा है जिस्म से छूट रहा है कुछ कुछ रूह में डूब
Read Moreस्पर्श कुरान हाथों में लेके नाबीना एक नमाज़ी लबों पे रखता था दोनों आँखों से चूमता था झुकाके पेशानी यूँ
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