Gulzar – Kaynaat
कायनात-१ बस चन्द करोड़ों सालों में सूरज की आग बुझेगी जब और राख उड़ेगी सूरज से जब कोई चाँद न
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कायनात-१ बस चन्द करोड़ों सालों में सूरज की आग बुझेगी जब और राख उड़ेगी सूरज से जब कोई चाँद न
Read Moreकुछ और मंजर-1 कभी कभी लैम्प पोस्ट के नीचे कोई लड़का दबा के पैन्सिल को उंगलियों में मुड़े-तुड़े काग़ज़ों को
Read Moreखुदा-१ बुरा लगा तो होगा ऐ खुदा तुझे, दुआ में जब, जम्हाई ले रहा था मैं– दुआ के इस अमल
Read Moreआम मोड़ पे देखा है वो बूढ़ा-सा इक आम का पेड़ कभी? मेरा वाकिफ़ है बहुत सालों से, मैं जानता
Read Moreवक्त-१ मैं उड़ते हुए पंछियों को डराता हुआ कुचलता हुआ घास की कलगियाँ गिराता हुआ गर्दनें इन दरख्तों की,छुपता हुआ
Read Moreरिश्ते बस रिश्ते होते हैं रिश्ते बस रिश्ते होते हैं कुछ इक पल के कुछ दो पल के कुछ परों
Read Moreफ़सादात-१ उफुक फलांग के उमरा हुजूम लोगों का कोई मीनारे से उतरा, कोई मुंडेरों से किसी ने सीढियां लपकीं, हटाई
Read Moreखुमानी, अखरोट! ख़ुमानी, अख़रोट बहुत दिन पास रहे थे दोनों के जब अक़्स पड़ा करते थे बहते दरिया में, पेड़ों
Read Moreदरिया इतनी सी उम्मीद लिये– शायद फिर से देख सके वह, इक दिन उस लड़की का चेहरा, जिसने फूल और
Read Moreएक में दो एक शरीर में कितने दो हैं, गिन कर देखो जितने दो हैं। देखने वाली आँखें दो हैं,
Read Moreमुंबई रात जब मुंबई की सड़कों पर अपने पंजों को पेट में लेकर काली बिल्ली की तरह सोती है अपनी
Read Moreकुछ खो दिया है पाइके कुछ खो दिया है पाइके कुछ पा लिया गवाइके। कहाँ ले चला है मनवा मोहे
Read Moreआँसू-१ अल्फाज जो उगते, मुरझाते, जलते, बुझते रहते हैं मेरे चारों तरफ, अल्फाज़ जो मेरे गिर्द पतंगों की सूरत उड़ते
Read Moreबर्फ़ पिघलेगी जब पहाड़ों से बर्फ़ पिघलेगी जब पहाड़ों से और वादी से कोहरा सिमटेगा बीज अंगड़ाई लेके जागेंगे अपनी
Read Moreबुड्ढा दरिया-१ मुँह ही मुँह कुछ बुड़बुड़ करता, बहता है ये बुड्ढा दरिया! कोई पूछे तुझको क्या लेना, क्या लोग
Read Moreज़ुबान पर ज़ायका आता था जो सफ़हे पलटने का ज़ुबान पर ज़ाएका आता था जो सफ़हे पलटने का अब उँगली
Read Moreपेन्टिंग-१ खड़खड़ाता हुआ निकला है उफ़ुक से सूरज, जैसे कीचड़ में फँसा पहिया धकेला हो किसी ने चिब्बे टिब्बे से
Read Moreकिस क़दर सीधा सहल साफ़ है यह रस्ता देखो किस क़दर सीधा सहल साफ़ है यह रस्ता देखो न किसी
Read Moreपड़ोसी-१ कुछ दिन से पड़ोसी के घर में सन्नाटा है, ना रेडियो चलता है, ना रात को आँगन में उड़ते
Read Moreदरख़्त रोज़ शाम का बुरादा भर के शाखों में दरख़्त रोज़ शाम का बुरादा भर के शाखों में पहाड़ी जंगलों
Read Moreकाली काली काली काली आँखों का काला काला जादू है आधा आधा तुझ बिन मैं आधी आधी सी तू है
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