Faiz Ahmed Faiz – Sharhe bedardi ae halaat na hone paayi
शरहे-बेदर्दी-ए-हालात न होने पाई शरहे-बेदर्दी-ए-हालात न होने पाई अबके भी दिल की मुदारात न होने पाई फिर वही वादा जो
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शरहे-बेदर्दी-ए-हालात न होने पाई शरहे-बेदर्दी-ए-हालात न होने पाई अबके भी दिल की मुदारात न होने पाई फिर वही वादा जो
Read Moreयूं सजा चांद कि झलका तिरे अन्दाज़ का रंग यूं सजा चांद कि झलका तिरे अन्दाज़ का रंग यूं फ़ज़ा
Read Moreख़ुरशीदे-महशर की लौ आज के दिन न पूछो मेरे दोस्तो दूर कितने हैं ख़ुशियां मनाने के दिन खुल के हंसने,
Read Moreयहां से शहर को देखो यहां से शहर को देखो तो हलका-दर-हलका खिंची है जेल की सूरत हर एक सिमत
Read Moreसिपाही का मरसिया उट्ठो अब माटी से उट्ठो जागो मेरे लाल अब जागो मेरे लाल तुमहारी सेज सजावन कारन देखो
Read Moreएक शहर आशोब का आग़ाज़ अब बज़्मे-सुख़न सोहबते-लबसोख़्तगां है अब हलका-ए-मय ताएफ़-ए-बेतलबां है घर रहिए तो वीरानी-ए-दिल खाने को आवे
Read Moreसरे-वादी-ए-सीना (अरब-इसराईल जंग, सन १९६७, के बाद) (१) फिर बर्क फ़रोज़ां है सरे-वादी-ए-सीना फिर रंग पे है शोला-ए-रुख़सारे-हकीकत पैग़ामे-अज़ल, दावते-दीदारे-हकीकत
Read Moreजरसे-गुल की सदा इस हवस में कि पुकारे जरसे-गुल की सदा दशतो-सहरा में सबा फिरती है यूं आवारा जिस तरह
Read Moreफ़रशे-नौमीदीए-दीदार देखने की तो किसे ताब है, लेकिन अब तक जब भी उस राह से गुज़रो तो किसी दुख की
Read Moreटूटी जहां-जहां पे कमन्द रहा न कुछ भी ज़माने में जब नज़र को पसन्द तिरी नज़र से किया रिशता-ए-नज़र पैवन्द
Read Moreहज़र करो मिरे तन से सजे तो कैसे सजे कत्ले-आम का मेला किसे लुभायेगा मेरे लहू का बावेला मिरे नज़ार
Read Moreतह-ब-तह दिल की कदूरत तह-ब-तह दिल की कदूरत मेरी आंखों में उमंड आई तो कुछ चारा न था चारागर की
Read More“आपकी याद आती रही रात-भर” मख़दूम की याद में-1 “आपकी याद आती रही रात-भर” चाँदनी दिल दुखाती रही रात-भर गाह
Read Moreअब के बरस दस्तूरे-सितम में अबके बरस दस्तूरे-सितम में क्या-क्या बाब ईज़ाद हुए जो कातिल थे मकतूल बने, जो सैद
Read Moreअगस्त, १९५२ रौशन कहीं बहार के इमकां हुए तो हैं गुलशन में चाक चन्द गरेबां हुए तो हैं अब भी
Read Moreईरानी तुलबा के नाम (जो अमन और आज़ादी की जद्द-ओ-जेहद में काम आए) यह कौन सख़ी हैं जिनके लहू की
Read Moreनौहा मुझको शिकवा है मेरे भाई कि तुम जाते हुए ले गए साथ मेरी उम्रे-गुज़िश्ता की किताब उसमें तो मेरी
Read Moreदो इश्क (१) ताज़ा हैं अभी याद में ऐ साकी-ए-गुलफ़ाम वो अकसे-रुख़े-यार से लहके हुए अय्याम वो फूल-सी-खिलती हुयी दीदार
Read Moreतराना दरबार-ए-वतन में जब इक दिन सब जाने वाले जाएंगे कुछ अपनी सज़ा को पहुंचेंगे, कुछ अपनी जज़ा ले जाएंगे
Read Moreतुम्हारे हुस्न के नाम सलाम लिखता है शायर तुम्हारे हुस्न के नाम बिखर गया जो कभी रंगे-पैरहन सरे-बाम निखर गयी
Read Moreदामने-यूसुफ़ जान बेचने को आये तो बे-दाम बेच दी ऐ अहले-मिसर, वज़ए-तकल्लुफ़ तो देखिये इंसाफ़ है कि हुक्मे-अकूबत से पेशतर
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