Gulzar – Zikr hota hai jahan bhi mere afsaane ka
ज़िक्र होता है जहाँ भी मिरे अफ़्साने का ज़िक्र होता है जहाँ भी मिरे अफ़्साने का एक दरवाज़ा सा खुलता
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ज़िक्र होता है जहाँ भी मिरे अफ़्साने का ज़िक्र होता है जहाँ भी मिरे अफ़्साने का एक दरवाज़ा सा खुलता
Read Moreतुझ को देखा है जो दरिया ने इधर आते हुए तुझ को देखा है जो दरिया ने इधर आते हुए
Read Moreपेड़ के पत्तों में हलचल है ख़बर-दार से हैं पेड़ के पत्तों में हलचल है ख़बर-दार से हैं शाम से
Read Moreतिनका तिनका काँटे तोड़े सारी रात कटाई की तिनका तिनका काँटे तोड़े सारी रात कटाई की क्यूँ इतनी लम्बी होती
Read Moreफूलों की तरह लब खोल कभी फूलों की तरह लब खोल कभी ख़ुशबू की ज़बाँ में बोल कभी अल्फ़ाज़ परखता
Read Moreदिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई जैसे एहसाँ उतारता है कोई दिल में कुछ
Read Moreबे-सबब मुस्कुरा रहा है चाँद बे-सबब मुस्कुरा रहा है चाँद कोई साज़िश छुपा रहा है चाँद जाने किस की गली
Read Moreबीते रिश्ते तलाश करती है बीते रिश्ते तलाश करती है ख़ुशबू ग़ुंचे तलाश करती है जब गुज़रती है उस गली
Read MoreHum dekhenge Lazim hai ke hum bhi dekhenge Woh din ke jis ka waada hai Jo loh-e-azl pe likha hai
Read Moreदीप जिस का महल्लात ही में जले चंद लोगों की ख़ुशियों को ले कर चले वो जो साए में हर
Read MoreKall subah mai nikla morning walk pe Li ek chai, baitha chownk pe Sooraj uga nahi tha chaand falak pe
Read Moreखुली किताब के सफ़्हे उलटते रहते हैं खुली किताब के सफ़्हे उलटते रहते हैं हवा चले न चले दिन पलटते
Read Moreकांच के ख्वाब देखो आहिस्ता चलो, और भी आहिस्ता ज़रा देखना, सोच-समझकर ज़रा पाँव रखना जोर से बज न उठे
Read Moreअभी न पर्दा गिराओ, ठहरो, कि दास्ताँ आगे और भी है अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो, कि दास्ताँ आगे और
Read Moreएक परवाज़ दिखाई दी है एक परवाज़ दिखाई दी है तेरी आवाज़ सुनाई दी है सिर्फ़ एक सफ़्हा पलट कर
Read Moreकोई अटका हुआ है पल शायद कोई अटका हुआ है पल शायद वक़्त में पड़ गया है बल शायद लब
Read Moreकोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है कोई ख़ामोश ज़ख़्म लगती है ज़िंदगी एक नज़्म लगती है बज़्म-ए-याराँ में रहता हूँ तन्हा
Read Moreनज़्म उलझी हुई है सीने में नज़्म उलझी हुई है सीने में मिसरे अटके हुए होंटों पर उड़ते-फिरते हैं तितलियों
Read Moreज़िक्र आए तो मिरे लब से दुआएँ निकलें ज़िक्र आए तो मिरे लब से दुआएँ निकलें शम्अ जलती है तो
Read Moreदंगे शहर में आदमी कोई भी नहीं क़त्ल हुआ नाम थे लोगों के जो क़त्ल हुए सर नहीं कटा किसी
Read Moreकल की रात गिरी थी शबनम कल की रात गिरी थी शबनम हौले-हौले कलियों के बन्द होंठों पर बरसी थी
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