Gulzar – Abhi na parda giraao
अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो कि दास्ताँ आगे और भी है अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो अभी तो टूटी है
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अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो कि दास्ताँ आगे और भी है अभी न पर्दा गिराओ, ठहरो अभी तो टूटी है
Read Moreमैं उड़ते हुए पंछियों को डराता हुआ कुचलता हुआ घास की कलगियाँ गिराता हुआ गर्दनें इन दरख़्तों की, छुपता हुआ
Read Moreरात भर सर्द हवा चलती रही रात भर हमने अलाव तापा मैंने माज़ी से कई ख़ुश्क सी शाख़ें काटीं तुमने
Read Moreवो जो शायर था चुप सा रहता था बहकी-बहकी सी बातें करता था आँखें कानों पे रख के सुनता था
Read Moreदेखो, आहिस्ता चलो और भी आहिस्ता ज़रा देखना, सोच सँभल कर ज़रा पाँव रखना ज़ोर से बज न उठे पैरों
Read Moreमुझसे इक नज़्म का वादा है, मिलेगी मुझको डूबती नब्ज़ों में, जब दर्द को नींद आने लगे ज़र्द सा चेहरा
Read Moreशहतूत की शाख़ पे बैठा कोई बुनता है रेशम के तागे लम्हा-लम्हा खोल रहा है पत्ता-पत्ता बीन रहा है एक-एक
Read Moreमुझको भी तरकीब सिखा कोई यार जुलाहे अक्सर तुझको देखा है कि ताना बुनते जब कोई तागा टूट गया या
Read Moreकिताबें झाँकती हैं बंद अलमारी के शीशों से बड़ी हसरत से ताकती हैं महीनों अब मुलाक़ातें नहीं होती जो शामें
Read Moreहर एक पुश्त की औकात उसकी लिखी है बचाके रखना तुम.. ये गोल सिक्के, दमकते हुए खनकते हुए किसी पे
Read Moreसुबह से शाम हुई और हिरन मुझको छलावे देता सारे जंगल में परेशां किये घूम रहा है अब तक उसकी
Read More1. उफुक फलांग के उमरा हुजूम लोगों का कोई मीनारे से उतरा, कोई मुंडेरों से किसी ने सीढियां लपकीं, हटाई
Read Moreहम सब भाग रहे थे रिफ्य़ूजी थे माँ ने जितने ज़ेवर थे, सब पहन लिये थे। बाँध लिये थे…. छोटी
Read Moreमैं जब भी ज़िंदगी की चिलचिलाती धूप में तप कर मैं जब भी दूसरों के और अपने झूट से थक
Read Moreचार तिनके उठा के जंगल से एक बाली अनाज की लेकर चंद कतरे बिलखते अश्कों के चंद फांके बुझे हुए
Read Moreजंगल में घूमता है पहरों, फ़िकरे-शिकार में दरिन्दा या अपने ज़ख़्म चाट-ता है, तन्हा कच्छार में दरिन्दा बातों में दोस्ती
Read Moreमैं कायनात में सय्यारों में भटकता था ….. धुएँ में ,धूल में उलझी हुई किरण की तरह मैं इस जमीं
Read Moreआँख खुल गई मेरी हो गया मैं फिर ज़िन्दा पेट के अन्धेरो से ज़हन के धुन्धलको तक एक साँप के
Read Moreपूरे का पूरा आकाश घुमा कर बाज़ी देखी मैंने काले घर में सूरज रख के, तुमने शायद सोचा था, मेरे
Read Moreहम तो बचपन में भी अकेले थे सिर्फ़ दिल की गली में खेले थे इक तरफ़ मोर्चे थे पलकों के
Read Moreमोड़ पे देखा है वह बूढ़ा सा एक पेड़ कभी? मेरा वाकिफ है, बहुत सालों से जानता हूँ जब मैं
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