Atal Bihari Vajpayee – Aaj sindhu mein jawaar utha hai
आज सिंधु में ज्वार उठा है नगपति फिर ललकार उठा है कुरुक्षेत्र के कण–कण से फिर पांचजन्य हुँकार उठा है।
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आज सिंधु में ज्वार उठा है नगपति फिर ललकार उठा है कुरुक्षेत्र के कण–कण से फिर पांचजन्य हुँकार उठा है।
Read Moreमर्दों ने काम बिगाड़ा है, मर्दों को गया पछाड़ा है झगड़े-फसाद की जड़ सारे जड़ से ही गया उखाड़ा है
Read Moreफ़रियाद की कोई लै नहीं है नाला पाबन्द-ए-नै नहीं है कयूं बोते हैं बाग़-बान तूम्बे गर बाग़ गदा-ए-मै नहीं है
Read Moreवो आके ख़्वाब में तसकीन-ए-इज़तिराब तो दे वले मुझे तपिश-ए-दिल मजाल-ए-ख़वाब तो दे करे है कतल, लगावट में तेरा रो
Read Moreहर कदम दूरी-ए-मंज़िल है नुमायां मुझ से मेरी रफ़तार से भागे है बयाबां मुझ से दरस-ए-उनवान-ए-तमाशा ब-तग़ाफ़ुल ख़ुशतर है निगह
Read Moreचाहिये, अच्छों को जितना चाहिये ये अगर चाहें, तो फिर क्या चाहिये सोहबत-ए-रिन्दां से वाजिब है हज़र जा-ए-मै अपने को
Read Moreग़म-ए-दुनिया से गर पायी भी फ़ुरसत सर उठाने की फ़लक का देखना तकरीब तेरे याद आने की खुलेगा किस तरह
Read More1 हरड़-बहेड़ा आँवला, घी सक्कर में खाए। हाथी दाबे काँख में, साठ कोस ले जाए। 2 मारन चाहो काऊ को,
Read Moreकाकी फूफा घर में हैं कि नायं, नायं तो नन्देऊ पांवरो होय तो ला दे, ला कथूरा में डोराई डारि
Read More1. पहेलियाँ 1 तरवर से इक तिरिया उतरी उसने बहुत रिझाया बाप का उससे नाम जो पूछा आधा नाम बताया
Read Moreअति सुरंग है रंग रंगीलो है गुणवंत बहुत चटकीलो राम भजन बिन कभी न सोता ऐ सखि साजन ? ना
Read Moreअपनी छवि बनाई के मैं तो पी के पास गई। जब छवि देखी पीहू की सो अपनी भूल गई।। अंगना
Read Moreपरबत बास मँगवा मोरे बाबुल, नीके मँडवा छाव रे। डोलिया फँदाय पिया लै चलि हैं अब संग नहिं कोई आव
Read Moreपरदेसी बालम धन अकेली मेरा बिदेसी घर आवना। बिर का दुख बहुत कठिन है प्रीतम अब आजावना। इस पार जमुना
Read Moreमोरा जोबना नवेलरा भयो है गुलाल। कैसे घर दीन्हीं बकस मोरी माल। निजामुद्दीन औलिया को कोई समझाए, ज्यों-ज्यों मनाऊँ वो
Read Moreधरे गए बंगलौर में, अडवानी के संग; दिन-भर थाने में रहे, हो गई हुलिया तंग; हो गई हुलिया तंग, श्याम
Read Moreतोरी सूरत के बलिहारी, निजाम, तोरी सूरत के बलिहारी । सब सखियन में चुनर मेरी मैली, देख हसें नर नारी,
Read Moreज़िहाल-ए मिस्कीं मकुन तगाफ़ुल, दुराये नैना बनाये बतियां । कि ताब-ए-हिजरां नदारम ऎ जान, न लेहो काहे लगाये छतियां ।
Read Moreबनने चली विश्व भाषा जो, अपने घर में दासी; सिंहासन पर अंगरेज़ी है, लखकर दुनिया हाँसी; लखकर दुनिया हाँसी, हिन्दीदां
Read Moreकाहे को ब्याहे बिदेस, अरे, लखिय बाबुल मोरे काहे को ब्याहे बिदेस भैया को दियो बाबुल महले दो-महले हमको दियो
Read Moreजो पिया आवन कह गए अजहुँ न आए, अजहुँ न आए स्वामी हो ऐ जो पिया आवन कह गए अजुहँ
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