Hindi Poetry

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Faiz Ahmed Faiz – Manzar

मंज़र रहगुज़र, साये, शजर, मंज़िल-ओ-दर, हल्क़ःए-बाम बाम पर सीना-ए-महताब खुला आहिस्ता जिस तरह खोले कोई बंदे-क़बा आहिस्ता हल्क़ा-ए-बाम तले, सायों

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