Hindi Poetry Faiz Ahmed Faiz – Hijar ki raakh aur bimil ke phool November 5, 2022 rhymecloud हिजर की राख और विसाल के फूल आज फिर दर्द-ओ-ग़म के धाग़े में हम पिरोकर तिरे ख़्याल के फूल तरक-ए-उलफ़त के दश्त से चुनकर आशनाई के माह-ओ-साल के फूल तेरी दहलीज़ पर सजा आये फिर तिरी याद पर चढ़ा आये बांधकर आरज़ू के पल्ले में हजर की राख और विसाल के फूल