Hindi Poetry Faiz Ahmed Faiz – Phool masle gye farsh-e-gulzaar par November 9, 2024 rhymecloud फूल मस्ले गये फ़र्शे-गुलज़ार पर फूल मस्ले गये फ़र्शे-गुलज़ार पर रंग छिड़का गया तख़्ता-ए-दार पर बज़्म बरपा करे जिसको मंज़ूर हो दावते-रक्स तलवार की धार पर दावते-बैयते-शह पे मुलज़िम बना कोई इकरार पर कोई इनकार पर