Hindi Poetry

Gulzar – Paanch bje hain


पाँच बजे हैं

पाँच बजे हैं
टी.वी. पर आनेवाले हफ़्ते की झाँकी
‘इस हफ़्ते में…’

सोमवार जाना है तुमको—
टी.वी. पर इक ड्रामा होगा
फ़िल्म पुरानी-छाया गीत !

वीरवार तुम लन्दन होगी
तीन दिनों में…मैं और…
हिन्दोस्तान में हिन्दी और….इंदिरा गाँधी—तेहरान का दौरा
विएतनाम में आज़ादी का जश्न मनेगा—
शायद उस दिन ख़त आएगा—
पाँच बचे हैं
चंद घण्टों के बाद तुम्हारा ‘प्लेन’ उड़ेगा।