Hindi Poetry Gulzar – Zubaan par zaiyka aata tha jo sfhe palatne se April 5, 2021 rhymecloud ज़ुबान पर ज़ायका आता था जो सफ़हे पलटने का ज़ुबान पर ज़ाएका आता था जो सफ़हे पलटने का अब उँगली ‘क्लिक’ करने से बस इक झपकी गुज़रती है बहुत कुछ तह-ब-तह खुलता चला जाता है परदे पर किताबों से जो जाती राब्ता था, कट गया है कभी सीने पे रख के लेट जाते थे