Mirza Ghalib – Kyon kar uss butt se rakhu jaan aziz
कयोंकर उस बुत से रखूं जान अज़ीज़
क्या नहीं है मुझे ईमान अज़ीज़
दिल से निकला प न निकला दिल से
है तेरे तीर का पैकान अज़ीज़
ताब लाये ही बनेगी ”ग़लिब”
बाक्या सख़त है और जान अज़ीज़
Punjabi, Hindi Poetry and Lyrics
कयोंकर उस बुत से रखूं जान अज़ीज़
क्या नहीं है मुझे ईमान अज़ीज़
दिल से निकला प न निकला दिल से
है तेरे तीर का पैकान अज़ीज़
ताब लाये ही बनेगी ”ग़लिब”
बाक्या सख़त है और जान अज़ीज़