Ramdhari Singh Dinkar – Sapno ka dhuan
सपनों का धुआँ “है कौन ?”, “मुसाफिर वही, कि जो कल आया था, या कल जो था मैं, आज उसी
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सपनों का धुआँ “है कौन ?”, “मुसाफिर वही, कि जो कल आया था, या कल जो था मैं, आज उसी
Read Moreझील मत छुओ इस झील को। कंकड़ी मारो नहीं, पत्तियाँ डारो नहीं, फूल मत बोरो। और कागज की तरी इसमें
Read Moreचांद का कुर्ता हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला, ‘‘सिलवा दो माँ मुझे ऊन का मोटा
Read Moreमिर्च का मज़ा एक काबुली वाले की कहते हैं लोग कहानी, लाल मिर्च को देख गया भर उसके मुँह में
Read Moreसूरज का ब्याह उड़ी एक अफवाह, सूर्य की शादी होने वाली है, वर के विमल मौर में मोती उषा पिराने
Read Moreनिराकार ईश्वर हर चीज, जो खूबसूरत है, किसी-न-किसी देह में है; सुन्दरता शरीर पाकर हँसती है, और जान हमेशा लहू
Read Moreईश्वर की देह ईश्वर वह प्रेरणा है, जिसे अब तक शरीर नहीं मिल है। टहनी के भीतर अकुल्राता हुआ फूल,
Read Moreबर्र और बालक सो रहा था बर्र एक कहीं एक फूल पर, चुपचाप आके एक बालक ने छू दिया बर्र
Read Moreकाढ़ लो दोनों नयन मेरे काढ़ लो दोनों नयन मेरे, तुम्हारी और अपलक देखना तब भी न छोड़ूँगा । तुम्हारे
Read Moreतुम सड़क पर जा रहे थे तुम सड़क पर जा रहे थे, मैं बगल की वीथि पर; तुम बहुत थे
Read Moreकवि और प्रेमी प्राप्त है इनको सखे! कुछ ज्ञान भी, अज्ञान भी। वायु हैं ये, विश्व के मन को बहा
Read Moreनाम तुम कहाँ से आ रहे हो? नाम क्या है? वह पुकारु शब्द मत मुझको बताओ, जो तुम्हारा आवरण है
Read Moreपढ़क्कू की सूझ एक पढ़क्कू बड़े तेज थे, तर्कशास्त्र पढ़ते थे, जहाँ न कोई बात, वहाँ भी नए बात गढ़ते
Read Moreसमुद्र का पानी बहुत दूर पर अट्टहास कर सागर हँसता है। दशन फेन के, अधर व्योम के। ऐसे में सुन्दरी!
Read Moreवातायन मैं झरोखा हूँ कि जिसकी टेक लेकर विश्व की हर चीज बाहर झाँकती है। पर, नहीं मुझ पर, झुका
Read Moreआशा की वंशी लिख रहे गीत इस अंधकार में भी तुम रवि से काले बरछे जब बरस रहे हैं, सरिताएँ
Read Moreपावस-गीत अम्बर के गृह गान रे, घन-पाहुन आये। इन्द्रधनुष मेचक-रुचि-हारी, पीत वर्ण दामिनि-द्युति न्यारी, प्रिय की छवि पहचान रे, नीलम
Read Moreआनंदातिरेक आनन्द का अतिरेक यह । हो मृत्यु की धारा अगर तो मुक्त बहने दो मुझे; हो जिन्दगी की छाँह
Read Moreजीवन पत्थरों में भी कहीं कुछ सुगबुगी है ? दूब यह चट्टान पर कैसे उगी है ? ध्वंस पर जैसे
Read Moreये गान बहुत रोये तुम बसे नहीं इनमें आकर, ये गान बहुत रोये । बिजली बन घन में रोज हँसा
Read Moreचंद्राह्वान जागो हे अविनाशी ! जागो किरणपुरुष ! कुमुदासन ! विधु-मंडल के वासी ! जागो है अविनाशी ! रत्न-जड़ित-पथ-चारी, जागो,
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