Suryakant Tripathi Nirala – De na gye bachne ki saans aas le gye
दे न गये बचने की साँस, आस ले गये दे न गये बचने की साँस, आस ले गये। रह-रहकर मारे
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दे न गये बचने की साँस, आस ले गये दे न गये बचने की साँस, आस ले गये। रह-रहकर मारे
Read Moreधीरे धीरे हँसकर आईं धीरे धीरे हँसकर आईं प्राणों की जर्जर परछाईं। छाया-पथ घनतर से घनतम, होता जो गया पंक-कर्दम,
Read Moreतरणि तार दो अपर पार को तरणि तार दो अपर पार को खे-खेकर थके हाथ, कोई भी नहीं साथ, श्रम-सीकर-भरा
Read Moreऔर न अब भरमाओ और न अब भरमाओ, पौर आओ, तुम आओ! जी की जो तुमसे चटकी है, बुद्धि-शुद्धि भटकी-भटकी
Read Moreबाँधो न नाव इस ठाँव, बंधु बाँधो न नाव इस ठाँव, बंधु! पूछेगा सारा गाँव, बंधु! यह घाट वही जिस
Read Moreकेशर की, कलि की पिचकारी केशर की, कलि की पिचकारी पात-पात की गात संवारी। राग-पराग-कपोल किये हैं, लाल-गुलाल अमोल लिये
Read Moreगिरते जीवन को उठा दिया गिरते जीवन को उठा दिया, तुमने कितना धन लुटा दिया! सूखी आशा की विषम फांस,
Read Moreनिविड़-विपिन, पथ अराल निविड़-विपिन, पथ अराल; भरे हिंस्र जन्तु-व्याल। मारे कर अन्धकार, बढ़ता है अनिर्वार, द्रुम-वितान, नहीं पार, कैसा है
Read Moreसुरतरु वर शाखा सुरतरु वर शाखा खिली पुष्प-भाषा। मीलित नयनों जपकर तन से क्षण-क्षण तपकर तनु के अनुताप प्रखर, पूरी
Read Moreहार गई मैं तुम्हें जगाकर हार गई मैं तुम्हें जगाकर, धूप चढ़ी प्रखर से प्रखरतर। वर्जन के जो वज्र-द्वार हैं,
Read Moreलघु-तटिनी, तट छाईं कलियां लघु-तटिनी, तट छाईं कलियां; गूँजी अलियों की आवलियाँ। तरियों की परियाँ हैं जल पर, गाती हैं
Read Moreचलीं निशि में तुम आई प्रात चलीं निशि में तुम आई प्रात; नवल वीक्षण, नवकर सम्पात, नूपुर के निक्वण कूजे
Read Moreप्रिय के हाथ लगाये जागी प्रिय के हाथ लगाये जागी, ऐसी मैं सो गई अभागी। हरसिंगार के फूल झर गये,
Read Moreतुमने स्वर के आलोक-ढले तुमने स्वर के आलोक-ढले गाये हैं गाने गले-गले। बचकर भव की भंगुरता से रागों के सुमनों
Read Moreवन-वन के झरे पात वन-वन के झरे पात, नग्न हुई विजन-गात। जैसे छाया के क्षण हंसा किसी को उपवन, अब
Read Moreतुमसे जो मिले नयन तुमसे जो मिले नयन, दूर हुए दुरित-शयन। खिले अंग-अंग अमल सर के पातः-शतदल पावन-पवनोत्कल-पल, अलक-मन्द-गन्ध-वयन। खग-कुल
Read Moreवेदना बनी मेरी अवनी वेदना बनी; मेरी अवनी। कठिन-कठिन हुए मृदुल पद-कमल विपद संकल भूमि हुई शयन-तुमुल कण्टकों घनी। तुमने
Read Moreहरि का मन से गुणगान करो हरि का मन से गुणगान करो, तुम और गुमान करो, न करो। स्वर-गंगा का
Read Moreआंख बचाते हो तो क्या आते हो आँख बचाते हो तो क्या आते हो? काम हमारा बिगड़ गया देखा रूप
Read Moreलिया-दिया तुमसे मेरा था लिया-दिया तुमसे मेरा था, दुनिया सपने का डेरा था। अपने चक्कर से कुल कट गये, काम
Read Moreगीत गाने दो मुझे तो गीत गाने दो मुझे तो, वेदना को रोकने को। चोट खाकर राह चलते होश के
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