Suryakant Tripathi Nirala – Neel jaldhi jal
नील जलधि जल नील जलधि जल, नील गगन-तल, नील कमल-दल, नील नयन द्वय। नील मॄत्ति पर नील मृत्यु-शर, नील अनिल-कर,
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नील जलधि जल नील जलधि जल, नील गगन-तल, नील कमल-दल, नील नयन द्वय। नील मॄत्ति पर नील मृत्यु-शर, नील अनिल-कर,
Read Moreसौन्दर्य (१) निस्सीम शक्ति निज को दर्पण में देख रही, तुम स्वयं शक्ति हो या दर्पण की छाया हो? (२)
Read Moreमेरी बिदाई (1) सुन्दर, सुखद, सूर्य से सेवित मेरे प्यारे देश बिदा! प्राच्य सिन्धु के मुक्ता! तेरे आगे तुच्छ विपिन
Read Moreचाँद निकले किसी जानिब तेरी ज़ेबाई का चाँद निकले किसी जानिब तेरी ज़ेबाई का रंग बदले किसी सूरत शबे-तनहाई का
Read Moreहार तुमसे बनी है जय हार तुमसे बनी है जय, जीत की जो चक्षु में क्षय। विषम कम्पन बली के
Read Moreक्या सुनाया गीत, कोयल क्या सुनाया गीत, कोयल! समय के समधीत, कोयल! मंजरित हैं कुंज, कानन, जानपद के पुंज-आनन, वर्ष
Read Moreकविता और प्रेम ऊपर सुनील अम्बर, नीचे सागर अथाह, है स्नेह और कविता, दोनों की एक राह। ऊपर निरभ्र शुभ्रता
Read Moreबेबसी का कोई दरमाँ नहीं करने देते बेबसी का कोई दरमाँ नहीं करने देते अब तो वीराना भी वीराँ नहीं
Read Moreहर घड़ी अक्से-रुख़े-यार लिए फिरती है हर घड़ी अक्से-रुख़े-यार लिए फिरती है कितने महताब शबे-तार लिए फिरती है सुन तो
Read Moreये दुख के दिन काटे हैं जिसने ये दुख के दिन काटे हैं जिसने गिन गिनकर पल-छिन, तिन-तिन। आँसू की
Read Moreइंक़लाब-ए-रूस (रूसी क्रान्ति की 50 वीं वर्षगाँठ पर) मुर्ग़े-बिस्मिल के मानिंद शब तिलमिलाई उफ़क-ता-उफ़क सुब्हे-महशर की पहली किरन जगमगाई तो
Read Moreगीत-गाये हैं मधुर स्वर गीत-गाये हैं मधुर स्वर, किरण-कर वीणा नवलतर। ताकते हैं लोग, आये कहाँ तुम, कैसे सुहाये, अनन्तर
Read Moreकुंज-कुंज कोयल बोली है कुंज-कुंज कोयल बोली है, स्वर की मादकता घोली है। कांपा है घन पल्लव-कानन, गूँजी गुहा श्रवण-उन्मादन,
Read Moreइस्तीफा लगा शाप, यह वाण गया झुक, शिथिल हुई धनु की डोरी, अंगों में छा रही, न जाने, तंद्रा क्यों
Read Moreख़्वाबे-परीशाँ हां ख़्वाहिश कि बीमार मेरे तनहा दिल ने इक ख़्वाब सभी ख़्वाबों की तरह प्यारा देखा लेकिन मेरे सब
Read Moreसम्राट एडवर्ड अष्टम के प्रति वीक्षण अगल:- बज रहे जहाँ जीवन का स्वर भर छन्द, ताल मौन में मन्द्र, ये
Read Moreमदह (हसीन शहीद सुहरवरदी मरहूम ने रावलपिंडी साजिश केस में मुलज़िमों की जानिब से वकालत की थी। मुकद्दमे के ख़ात्मे
Read Moreगीत-अब क्या देखें राह तुम्हारी फ़िल्म : जागो हुआ सवेरा अब क्या देखें राह तुम्हारी बीत चली है रात छोड़ो
Read Moreप्लेग सब देते गालियाँ, बताते औरत बला बुरी है, मर्दों की है प्लेग भयानक, विष में बुझी छुरी है। और
Read Moreमरसिया-ए-इमाम रात आई है शब्बीर पे यलग़ारे-बला है साथी न कोई यार न ग़मख़्वार रहा है मूनिस है तो इक
Read Moreमित्र के प्रति (1) कहते हो, ‘‘नीरस यह बन्द करो गान- कहाँ छन्द, कहाँ भाव, कहाँ यहाँ प्राण ? था
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