Ramdhari Singh Dinkar – Bharat ka aagman
भारत का आगमन कुछ आये शर-चाप उठाये राग प्रलय का गाते, मानवता पर पड़े हुए पर्वत की धूल उड़ाते ।
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भारत का आगमन कुछ आये शर-चाप उठाये राग प्रलय का गाते, मानवता पर पड़े हुए पर्वत की धूल उड़ाते ।
Read Moreहिजर की राख और विसाल के फूल आज फिर दर्द-ओ-ग़म के धाग़े में हम पिरोकर तिरे ख़्याल के फूल तरक-ए-उलफ़त
Read Moreख़्वाब बसेरा इस वकत तो यूं लगता है अब कुछ भी नहीं है महताब न सूरज न अंधेरा न सवेरा
Read Moreएक तराना मुजाहदीने-फ़लिस्तीन के लिये हम जीतेंगे हक्का हम इक दिन जीतेंगे बिल आख़िर इक दिन जीतेंगे क्या ख़ौफ़ ज़ि-यलग़ारे-आदा
Read Moreएक नग़मा करबला-ए-बेरूत के लिये (बेरूत पर इसराईली हमले के वकत लिखी गई) बेरूत निगारे-बज़्मे-जहां बेरूत बदीले-बाग़े-जिनां बच्चों की हंसती
Read Moreमेजर इसहाक की याद में लो तुम भी गये हमने तो समझा था कि तुमने बांधा था कोई यारों से
Read Moreइकबाल ज़माना था कि हर फ़रद इंतज़ारे-मौत करता था अमल की आरज़ू बाकी न थी बाज़ू-ए-इनसां में बिसाते-दहर पर गोया
Read Moreचुम्बन सब तुमने कह दिया, मगर, यह चुम्बन क्या है? “प्यार तुम्हें करता हूँ मैं”, इसमें जो “मैं” है, चुम्बन
Read Moreप्रेम (१) प्रेम की आकुलता का भेद छिपा रहता भीतर मन में, काम तब भी अपना मधु वेद सदा अंकित
Read Moreहंसो अधर-धरी हंसी हंसो अधर-धरी हंसी, बसो प्राण-प्राण-बसी। करुणा के रस ऊर्वर कर दो ऊसर-ऊसर दुख की सन्ध्या धूसर हीरक-तारकों-कसी।
Read Moreफ़ैज़ का आख़िरी कलाम बहुत मिला न मिला ज़िन्दगी से ग़म क्या है मताए-दर्द बहम है तो बेशो-कम क्या है
Read Moreहम्द मलिकए-शहरे-ज़िन्दगी तेरा शुक्र किस तौर से अदा कीजे दौलते-दिल का कुछ शुमार नहीं तंगदस्ती का क्या गिला कीजे जो
Read Moreराजर्षि अभिनन्दन (स्वर्गीय राजर्षि पुरषोत्तमदास टंडन के अभिनन्दन में) जन-हित निज सर्वस्व दान कर तुम तो हुए अशेष; क्या देकर
Read Moreगो सबको बहम साग़रो-बादः तो नहीं था गो सबको बहम साग़रो-बादः तो नहीं था ये शह्र उदास इतना ज़ियादा तो
Read Moreभजन कर हरि के चरण, मन भजन कर हरि के चरण, मन! पार कर मायावरण, मन! कलुष के कर से
Read Moreभारत-व्रत (सन् 1955 ई. में रुसी नेतओं के दिल्ली-आगमन के अवसर पर विरचित) स्वागत लोहित सूर्य ! यहाँ निर्मल, नीलाभ
Read Moreकठिन यह संसार, कैसे विनिस्तार कठिन यह संसार, कैसे विनिस्तार? ऊर्मि का पाथार कैसे करे पार? अयुत भंगुर तरंगों टूटता
Read Moreगीत : सुखी रहे तेरी रात सुखी रहे तेरी रात चंदा सुखी रहे तेरी रात दूर है चैन की नगरी
Read Moreअनमिल-अनमिल मिलते अनमिल-अनमिल मिलते प्राण, गीत तो खिलते। उड़ती हैं छुट-छुटकर आँखें मन के नभ पर और किसी मणि के
Read Moreवातायन निज वातायन से तुम्हें देखता मैं बेसुध, जब-जब तुम रेलिंग पकड़ खड़ी हो जाती हो, चाँदनी तुम्हारी खिड़की पर
Read Moreसूरज का ब्याह उड़ी एक अफवाह, सूर्य की शादी होने वाली है, वर के विमल मौर में मोती उषा पिराने
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