Ramdhari Singh Dinkar – Phoonk de jo praan mein uttejna
फूँक दे जो प्राण में उत्तेजना फूँक दे जो प्राण में उत्तेजना, गुण न वह इस बाँसुरी की तान में।
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फूँक दे जो प्राण में उत्तेजना फूँक दे जो प्राण में उत्तेजना, गुण न वह इस बाँसुरी की तान में।
Read Moreकलातीर्थ (१) पूर्णचन्द्र-चुम्बित निर्जन वन, विस्तृत शैल प्रान्त उर्वर थे; मसृण, हरित, दूर्वा-सज्जित पथ, वन्य कुसुम-द्रुम इधर-उधर थे। पहन शुक्र
Read Moreकोई आशिक किसी महबूबा से गुलशने-याद में गर आज दमे-बादे-सबा फिर से चाहे कि गुल-अफ़शां हो तो हो जाने दो
Read Moreदिले-मन मुसाफ़िरे-मन मिरे दिल, मिरे मुसाफ़िर हुआ फिर से हुक़्म सादिर कि वतन-बदर हों हम तुम दें गली-गली सदाएं करें
Read Moreयार अग़ियार हो गए हैं यार अग़ियार हो गए हैं और अग़ियार मुसिर हैं कि वो सब यारे-ग़ार हो गए
Read Moreवापस लौट आई है बहार जाग उठी सरसों की किरनें वापस लौट आई है बहार पौधे संवरे, सबज़ा निखरा धुल
Read Moreफूटे हैं आमों में बौर फूटे हैं आमों में बौर, भौंर वन-वन टूटे हैं। होली मची ठौर-ठौर, सभी बन्धन छूटे
Read Moreआज प्रथम गाई पिक पंचम आज प्रथम गाई पिक पंचम। गूंजा है मरु विपिन मनोरम। मस्त प्रवाह, कुसुम तरु फूले,
Read Moreआवाज़ें ज़ालिम जशन है मातमे-उम्मीद का आओ लोगो मरगे-अम्बोह का तयोहार मनायो लोगो अदम-आबाद को आबाद किया है मैंने तुम
Read Moreशायर लोग (कफ़काज के शायर कासिन कुली से माखूज़) हर-इक दौर में, हर ज़माने में हम ज़हर पीते रहे, गीत
Read Moreप्याम-ए-तजदीद अहदे-उलफ़त को मुद्दतें गुज़रीं दौरे-राहत को मुद्दतें गुज़रीं मिसले-तस्वीरे-यास है दुनिया हाय कितनी उदास है दुनिया फिर तुझे याद
Read Moreगीतवासिनी सात रंगों के दिवस, सातो सुरों की रात, साँझ रच दूँगा गुलावों से, जवा से प्रात। पाँव धरने के
Read Moreतोड़ती पत्थर वह तोड़ती पत्थर; देखा मैंने उसे इलाहाबाद के पथ पर- वह तोड़ती पत्थर। कोई न छायादार पेड़ वह
Read Moreउदबोधन गरज गरज घन अंधकार में गा अपने संगीत, बन्धु, वे बाधा-बन्ध-विहीन, आखों में नव जीवन की तू अंजन लगा
Read Moreतट पर नव वसन्त करता था वन की सैर जब किसी क्षीण-कटि तटिनी के तट तरुणी ने रक्खे थे अपने
Read Moreअलि की गूँज चली द्रुम कुँजों अलि की गूँज चली द्रुम कुँजों। मधु के फूटे अधर-अधर धर। भरकर मुदे प्रथम
Read Moreराहु चेतनाहीन ये फूल तड़पना क्या जानें ? जब भी आ जाती हवा की पग बढाते हैं । झूलते रात
Read Moreवलि की खेती जो अनिल-स्कन्ध पर चढ़े हुए प्रच्छन्न अनल ! हुतप्राण वीर की ओ ज्वलन्त छाया अशेष ! यह
Read Moreतुम क्यों लिखते हो तुम क्यों लिखते हो? क्या अपने अंतरतम को औरों के अंतरतम के साथ मिलाने को? अथवा
Read Moreभगवान की बिक्री लोगे कोई भगवान? टके में दो दूँगा। लोगे कोई भगवान? बड़ा अलबेला है। साधना-फकीरी नहीं, खूब खाओ,
Read Moreमिरे हमदम, मिरे दोस्त गर मुझे इसका यकीं हो, मिरे हमदम, मिरे दोस्त गर मुझे इसका यकीं हो कि तेरे
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