Mirza Ghalib – Dil se teri nigah jigar tak utar gyi
दिल से तेरी निगाह जिगर तक उतर गई दोनों को इक अदा में रज़ामन्द कर गई चाक हो गया है
Read MorePunjabi, Hindi Poetry and Lyrics
दिल से तेरी निगाह जिगर तक उतर गई दोनों को इक अदा में रज़ामन्द कर गई चाक हो गया है
Read Moreआओ फिर से दिया जलाएँ भरी दुपहरी में अंधियारा सूरज परछाई से हारा अंतरतम का नेह निचोड़ें- बुझी हुई बाती
Read Moreवह वक्त मेरी जान बहुत दूर नहीं है जब दर्द से रुक जायेंगी सब ज़ीसत की राहें और हद से
Read Moreदूर कहीं कोई रोता है । तन पर पैहरा भटक रहा मन, साथी है केवल सूनापन, बिछुड़ गया क्या स्वजन
Read Moreख़ून क्यों सफ़ेद हो गया? भेद में अभेद खो गया। बँट गये शहीद, गीत कट गए, कलेजे में कटार दड़
Read Moreआदमी न ऊंचा होता है, न नीचा होता है, न बड़ा होता है, न छोटा होता है। आदमी सिर्फ आदमी
Read Moreपन्द्रह अगस्त का दिन कहता – आज़ादी अभी अधूरी है। सपने सच होने बाक़ी हैं, राखी की शपथ न पूरी
Read Moreपृथिवी पर मनुष्य ही ऐसा एक प्राणी है, जो भीड़ में अकेला, और, अकेले में भीड़ से घिरा अनुभव करता
Read Moreमाँ के सभी सपूत गूँथते ज्वलित हृदय की माला। हिन्दुकुश से महासिंधु तक जगी संघटन-ज्वाला। हृदय-हृदय में एक आग है,
Read Moreबाधाएँ आती हैं आएँ घिरें प्रलय की घोर घटाएँ, पावों के नीचे अंगारे, सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ, निज हाथों
Read Moreराजपथ पर भीड़, जनपथ पड़ा सूना, पलटनों का मार्च, होता शोर दूना। शोर से डूबे हुए स्वाधीनता के स्वर, रुद्ध
Read Moreकर्तव्य के पुनीत पथ को हमने स्वेद से सींचा है, कभी-कभी अपने अश्रु और— प्राणों का अर्ध्य भी दिया है।
Read Moreजन की लगाय बाजी गाय की बचाई जान, धन्य तू विनोबा! तेरी कीरति अमर है। दूध बलकारी, जाको पूत हलधारी
Read Moreहाथों की हल्दी है पीली, पैरों की मेहँदी कुछ गीली पलक झपकने से पहले ही सपना टूट गया। दीप बुझाया
Read Moreदिल्ली के दरबार में, कौरव का है ज़ोर; लोक्तंत्र की द्रौपदी, रोती नयन निचोर; रोती नयन निचोर नहीं कोई रखवाला;
Read Moreबस का परमिट मांग रहे हैं, भैया के दामाद; पेट्रोल का पंप दिला दो, दूजे की फरियाद; दूजे की फरियाद,
Read Moreमायानगरी देख ली, इन्द्रजाल की रात; आसमान को चूमती, धरती की बारात; धरती की बारात, रूप का रंग निखरता; रस
Read Moreजब कभी नाम-ए-मोहम्मद लब पे मेरे आए है लब से लब मिलते हैं जैसे दिल से दिल मिल जाए है
Read Moreअनुशासन के नाम पर अनुशासन का खून भंग कर दिया संघ को कैसा चढ़ा जुनून कैसा चढ़ा जुनून मातृ-पूजा प्रतिबंधित
Read Moreख़िज़ाँ के जाने से हो या बहार आने से चमन में फूल खिलेंगे किसी बहाने से वो देखता रहे मुड़
Read Moreहरी हरी दूब पर ओस की बूंदे अभी थी, अभी नहीं हैं। ऐसी खुशियाँ जो हमेशा हमारा साथ दें कभी
Read More