Gulzar – Bndobast hai, zabardust hai
बंदोबस्त है जबर्दस्त है खून की खुश्बू बड़ी मस्त है हमारा हुक्मरां बड़ा अरे कम्बखत है बंदोबस्त है जबर्दस्त समय
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बंदोबस्त है जबर्दस्त है खून की खुश्बू बड़ी मस्त है हमारा हुक्मरां बड़ा अरे कम्बखत है बंदोबस्त है जबर्दस्त समय
Read Moreकुछ तुमने कहा कुछ मैंने कहा और बढ़ते-बढ़ते बात बढ़ी दिल ऊब गया दिन डूब गया और गहरी-काली रात बढ़ी
Read Moreनसीब आज़माने के दिन आ रहे हैं क़रीब उन के आने के दिन आ रहे हैं जो दिल से कहा
Read Moreदर्द कुछ दिन तो मेह्माँ ठहरे हम बिज़द हैं कि मेज़बाँ ठहरे सिर्फ़ तन्हाई सिर्फ़ वीरानी ये नज़र जब उठे
Read Moreजय हिन्द, हिन्द, जय हिन्द, हिन्द जय हिन्द हिन्द, जय हिन्द, हिन्द जय हिन्द, हिन्द, जय हिन्द, हिन्द जय हिन्द
Read Moreमैं ख़ुद भी कब ये कहता हूँ कोई सबब नहीं तू सच है मुझको छोड़ भी दे तो अजब नहीं
Read Moreसरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है ऐ शहीद-ए-मुल्क-ओ-मिल्लत मैं तिरे ऊपर
Read Moreडूब रहे हो और बहते हो दरिया किनारे क्यूँ रहते हो याद आते हैं वादे जिनके तेज हवा में सूखे
Read More1 दश्ते-जुनूँ वीरानियाँ, क़ह्ते-सुकूँ हैरानियाँ, इक दिल और उसकी बे-सरो-सामानियाँ, अज़ ख़ाकदाँ ता आस्माँ, तन्हाइयाँ-तन्हाइयाँ-तन्हाइयाँ चेहरा ज़मीं का ज़र्द है,
Read Moreदिल का रसिया और कहाँ होगा इश्क की आग का धुआँ जहाँ होगा पीड़ा पाले ग़म सहलाए कैसे-कैसे जी बहलाए
Read Moreखुला है दर प तिरा इंतेज़ार जाता रहा ख़ुलूस तो है मगर एतेबार जाता रहा किसी की आँख में मस्ती
Read Moreख़्वाब टूटे न कोई… देखो आहिस्ता चलो और भी आहिस्ता ज़रा काँच के ख़्वाब हैं बिखरे हुए तन्हाई में ख़्वाब
Read Moreशुक्र है ख़ैरियत से हूँ साहब आपसे और क्या कहूँ साहब अब समझने लगा हूँ सूदो-ज़िंयाँ अब कहाँ मुझमें वो
Read Moreबैरागी बादल बैरागी बादल बैरागी बादल आए आये रे बादल आए… आते हैं जैसे आर्य आए गर्जाते घोड़े, रथ दौड़ाते
Read Moreअजीब क़िस्सा है जब ये दुनिया समझ रही थी तुम अपनी दुनिया में जी रही हो मैं अपनी दुनिया में
Read Moreकल की रात गिरी थी शबनम हौले-हौले कलियों के बन्द होंठों पर बरसी थी शबनम कल की रात… फूलों के
Read Moreदर्द अपनाता है पराए कौन कौन सुनता है और सुनाए कौन कौन दोहराए फिर वही बातें ग़म अभी सोया है,
Read Moreयार जुलाहे, यार जुलाहे मुझको भी तरकीब सिखा कोई यार जुलाहे, यार जुलाहे… अक्सर तुझको देखा है कि ताना बुनते
Read Moreनिगल गए सब की सब समुंदर, ज़मीं बची अब कहीं नहीं है बचाते हम अपनी जान जिसमें वो कश्ती भी
Read Moreवो जो कहलाता था दीवाना तिरा वो जिसे हिफ़्ज़ था अफ़्साना तिरा जिसकी दीवारों पे आवेज़ां थीं तस्वीरें तिरी वो
Read Moreसारी हैरत है मिरी सारी अदा उसकी है बेगुनाही है मिरी और सजा उसकी है मेरे अल्फ़ाज़ में जो रंग
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