Faiz Ahmed Faiz – Mori araz suno
मोरी अरज सुनो (नज़र-ए-ख़ुसरो) “मोरी अरज सुनो दस्तगीर पीर” “माई री कहूं, कासे मैं अपने जिया की पीर” “नैया बांधो
Read MorePunjabi, Hindi Poetry and Lyrics
मोरी अरज सुनो (नज़र-ए-ख़ुसरो) “मोरी अरज सुनो दस्तगीर पीर” “माई री कहूं, कासे मैं अपने जिया की पीर” “नैया बांधो
Read Moreलेनिनगराड का गोरिसतान सर्द सिलों पर ज़रद सिलों पर ताज़ा गरम लहू की सूरत गुलदस्तों के छींटे हैं कतबे सब
Read Moreकुछ इश्क किया कुछ काम किया वो लोग बहुत ख़ुश-किस्मत थे जो इश्क को काम समझते थे या काम से
Read Moreदर-ए-उमीद के दरयूज़ागर फिर फरेरे बन के मेरे तन-बदन की धज्जीयां शहर के दीवारो-दर को रंग पहनाने लगीं फिर कफ़-आलूदा
Read Moreअतीत के द्वार पर ‘जय हो’, खोलो अजिर-द्वार मेरे अतीत ओ अभिमानी! बाहर खड़ी लिये नीराजन कब से भावों की
Read Moreआज इक हरफ़ को फिर ੧ आज इक हरफ़ को फिर ढूंढता फिरता है ख़्याल मध-भरा हरफ़ कोई ज़हर-भरा हरफ़
Read Moreदरबार में अब सतवते-शाही की अलामत दरबार में अब सत्वते-शाही की अलामत दरबां का असा है कि मुसन्निफ़ की कलम
Read Moreहम मुसाफ़िर यूँ ही मसरूफ़े सफ़र जाएँगे हम मुसाफ़िर यूँ ही मसरूफ़े सफ़र जाएँगे बेनिशाँ हो गए जब शहर तो
Read Moreजैसे हम-बज़्म हैं फिर यारे-तरहदार से हम जैसे हम-बज़्म हैं फिर यारे-तरहदार से हम रात मिलते रहे अपने दर-ओ-दीवार से
Read Moreफिर आईना-ए-आलम शायद कि निखर जाये फिर आईना-ए-आलम शायद कि निखर जाये फिर अपनी नज़र शायद ताहद्दे-नज़र जाये सहरा पे
Read Moreफूल मस्ले गये फ़र्शे-गुलज़ार पर फूल मस्ले गये फ़र्शे-गुलज़ार पर रंग छिड़का गया तख़्ता-ए-दार पर बज़्म बरपा करे जिसको मंज़ूर
Read Moreतुम ही कहो क्या करना है जब दुख की नदिया में हमने जीवन की नाव डाली थी था कितना कस-बल
Read Moreइश्क अपने मुजरिमों को पा-ब-जौलां ले चला दार की रस्सियों के गुलूबन्द गर्दन में पहने हुए गानेवाले इक रोज़ गाते
Read Moreये किस दयार-ए-अदम में नहीं है यूं तो नहीं है कि अब नहीं पैदा किसी के हुस्न में शमशीरे-आफ़ताब का
Read Moreनज़र-ए-हसरत मोहानी मर जायेंगे ज़ालिम कि हिमायत न करेंगे अहरार कभी तरके-रवायत न करेंगे क्या कुछ न मिला है जो
Read Moreजो मेरा तुम्हारा रिश्ता है मैं क्या लिखूं कि जो मेरा तुम्हारा रिशता है वो आशिकी की ज़बां में कहीं
Read Moreआज शब कोई नहीं है आज शब दिल के करीं कोई नहीं है आंख से दूर तिलसमात के दर वा
Read Moreइधर न देखो इधर न देखो कि जो बहादुर कलम के या तेग़ के धनी थे जो अज़मो-हिम्मत के मुद्दई
Read Moreशाम-ए-ग़ुरबत दश्त में सोख़ता सामानों पे रात आई है ग़म के सुनसान बियाबानों पे रात आई है नूरे-इरफ़ान के दीवानों
Read Moreतराना-2 हम देखेंगे लाज़िम है कि हम भी देखेंगे वोह दिन के जिसका वादा है जो लौहे अज़ल में लिक्खा
Read Moreअब बज़्मे-सुख़न सुहबते-सोख़्तगाँ है अब बज़्मे-सुख़न सुहबते-सोख़्तगाँ है अब हल्कः-ए-मय तायफ़ः-ए-बेतलबाँ है हम सहल तलब कौन से फ़रहाद थे, लेकिन
Read More