Suryakant Tripathi Nirala – Kya sunaya geet, koyal
क्या सुनाया गीत, कोयल क्या सुनाया गीत, कोयल! समय के समधीत, कोयल! मंजरित हैं कुंज, कानन, जानपद के पुंज-आनन, वर्ष
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क्या सुनाया गीत, कोयल क्या सुनाया गीत, कोयल! समय के समधीत, कोयल! मंजरित हैं कुंज, कानन, जानपद के पुंज-आनन, वर्ष
Read Moreये दुख के दिन काटे हैं जिसने ये दुख के दिन काटे हैं जिसने गिन गिनकर पल-छिन, तिन-तिन। आँसू की
Read Moreगीत-गाये हैं मधुर स्वर गीत-गाये हैं मधुर स्वर, किरण-कर वीणा नवलतर। ताकते हैं लोग, आये कहाँ तुम, कैसे सुहाये, अनन्तर
Read Moreकुंज-कुंज कोयल बोली है कुंज-कुंज कोयल बोली है, स्वर की मादकता घोली है। कांपा है घन पल्लव-कानन, गूँजी गुहा श्रवण-उन्मादन,
Read Moreसम्राट एडवर्ड अष्टम के प्रति वीक्षण अगल:- बज रहे जहाँ जीवन का स्वर भर छन्द, ताल मौन में मन्द्र, ये
Read Moreमित्र के प्रति (1) कहते हो, ‘‘नीरस यह बन्द करो गान- कहाँ छन्द, कहाँ भाव, कहाँ यहाँ प्राण ? था
Read Moreदान वासन्ती की गोद में तरुण, सोहता स्वस्थ-मुख बालारुण; चुम्बित, सस्मित, कुंचित, कोमल तरुणियों सदृश किरणें चंचल; किसलयों के अधर
Read Moreप्रेयसी घेर अंग-अंग को लहरी तरंग वह प्रथम तारुण्य की, ज्योतिर्मयि-लता-सी हुई मैं तत्काल घेर निज तरु-तन। खिले नव पुष्प
Read Moreमधुर स्वर तुमने बुलाया मधुर स्वर तुमने बुलाया, छद्म से जो मरण आया। बो गई विष वायु पच्छिम, मेघ के
Read Moreगवना न करा गवना न करा। खाली पैरों रास्ता न चला। कंकरीली राहें न कटेंगी, बेपर की बातें न पटेंगी,
Read Moreकैसे हुई हार तेरी निराकार कैसे हुई हार तेरी निराकार, गगन के तारकों बन्द हैं कुल द्वार? दुर्ग दुर्घर्ष यह
Read Moreतुम आये, कनकाचल छाये तुम आये, कनकाचल छाये, ऐ नव-नव किसलय फैलाये। शतशत वल्लरियाँ नत-मस्तक, झुककर पुष्पाधर मुसकाये। परिणय अगणन
Read Moreउनसे-संसार, भव-वैभव-द्वार उनसे-संसार, भव-वैभव-द्वार। समझो वर निर्जर रण; करो बार बार स्मरण, निराकार करण-हरण, शरण, मरणपार। रवि की छवि के
Read Moreप्रलाप वीणानिन्दित वाणी बोल! संशय-अन्धकामय पथ पर भूला प्रियतम तेरा– सुधाकर-विमल धवल मुख खोल! प्रिये, आकाश प्रकाशित करके, शुष्ककण्ठ कण्टकमय
Read Moreदिल्ली क्या यह वही देश है— भीमार्जुन आदि का कीर्ति क्षेत्र, चिरकुमार भीष्म की पताका ब्रह्माचर्य-दीप्त उड़ती है आज भी
Read Moreखेलूंगी कभी न होली खेलूंगी कभी न होली उससे नहीं जो हमजोली। यहां आंख कहीं कुछ बोली यह हुई श्याम
Read Moreकहाँ देश है (१) ‘अभी और है कितनी दूर तुम्हारा प्यारा देश?’– कभी पूछता हूँ तो तुम हँसती हो प्रिय,
Read Moreतपी आतप से जो सित गात तपी आतप से जो सित गात, गगन गरजे घन, विद्युत पात। पलटकर अपना पहला
Read Moreज्येष्ठ (१) ज्येष्ठ! क्रूरता-कर्कशता के ज्येष्ठ! सृष्टि के आदि! वर्ष के उज्जवल प्रथम प्रकाश! अन्त! सृष्टि के जीवन के हे
Read Moreरेखा यौवन के तीर पर प्रथम था आया जब श्रोत सौन्दर्य का, वीचियों में कलरव सुख चुम्बित प्रणय का था
Read Moreआवेदन (गीत) फिर सवाँर सितार लो! बाँध कर फिर ठाट, अपने अंक पर झंकार दो! शब्द के कलि-कल खुलें, गति-पवन-भर
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