Hindi Poetry

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Gulzar – Waqt

वक्त-१ मैं उड़ते हुए पंछियों को डराता हुआ कुचलता हुआ घास की कलगियाँ गिराता हुआ गर्दनें इन दरख्तों की,छुपता हुआ

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Gulzar – Aansu

आँसू-१ अल्फाज जो उगते, मुरझाते, जलते, बुझते रहते हैं मेरे चारों तरफ, अल्फाज़ जो मेरे गिर्द पतंगों की सूरत उड़ते

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