Faiz Ahmed Faiz – Husan aur Maut
जो फूल सारे गुलसितां में सबसे अच्छा हो फ़रोग़े-नूर हो जिससे फ़ज़ा-ए-रंगीं में ख़िज़ां के जौरो-सितम को न जिसने देखा
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जो फूल सारे गुलसितां में सबसे अच्छा हो फ़रोग़े-नूर हो जिससे फ़ज़ा-ए-रंगीं में ख़िज़ां के जौरो-सितम को न जिसने देखा
Read Moreकुछ मेरी सुनो, कुछ अपनी कहो हो पास तो ऐसे चुप न रहो हम पास भी हैं, और दूर भी
Read More(1) पुरसुकूं लगती है कितनी झील के पानी पे बत पैरों की बेताबियाँ पानी के अंदर देखिए। (2) जो दुश्मनी
Read Moreतसव्वुर शोख़ियां मुज़तर निगाहे-दीदा-ए-सरशार में इशरतें ख्वाबीदा रंगे-ग़ाजा-ए-रुख़सार में सुरख़ होठों पर तबस्सुम की ज़ियाएं, जिस तरह यासमन के फूल
Read Moreमौत अपनी, न अमल अपना, न जीना अपना खो गया शोरिशे-गेती में करीना अपना नाख़ुदा दूर, हवा तेज़, करीं कामे-नेहंग
Read Moreघुल रहा है सारा मंज़र शाम धुंधली हो गयी चांदनी की चादर ओढ़े हर पहाड़ी सो गयी वादियों में पेड़
Read Moreवो जिसकी दीद में लाखों मसर्रतें पिन्हाँ वो हुस्न जिसकी तमन्ना में जन्नतें पिन्हाँ हज़ार फित्ने तहे-पा-ए-नाज़ ख़ाकनशीं हर एक
Read Moreकत्थई आँखों वाली इक लड़की एक ही बात पर बिगड़ती है तुम मुझे क्यों नहीं मिले पहले रोज़ ये कह
Read Moreबरबते-दिल के तार टूट गये हैं ज़मीं-बोस राहतों के महल मिट गये किस्साहा-ए-फ़िक्रो अमल बज़मे-हसती के जाम फूट गये छिन
Read Moreहाँ गुनहगार हूँ मैं जो सज़ा चाहे अदालत देदे आपके सामने सरकार हूँ मैं मुझको इकरार कि मैंने इक दिन
Read Moreआज की रात साज़े-दर्द न छेड़ दुख से भरपूर दिन तमाम हुए और कल की ख़बर किसे मालूम दोशो-फ़र्दा की
Read Moreबहाना ढूँढते रहते हैं कोई रोने का हमें ये शौक़ है क्या आस्तीं भिगोने का अगर पलक पे है मोती
Read Moreख्यालो-शे’र की दुनिया में जान थी जिनसे फ़ज़ा-ए-फ़िक्रो-अमल अरग़वान थी जिनसे वो जिनके नूर से शादाब थे महो-अंजुम जुनूने-इश्क की
Read Moreदुख के जंगल में फिरते हैं कब से मारे मारे लोग जो होता है सह लेते हैं कैसे हैं बेचारे
Read Moreबाम-ओ-दर ख़ामशी के बोझ से चूर आसमानों से जू-ए-दर्द रवां चांद का दुख-भरा फ़साना-ए-नूर शाहराहों की ख़ाक में गलतां ख्वाबगाहों
Read Moreख़ला के गहरे समुंदरों में अगर कहीं कोई है जज़ीरा जहाँ कोई साँस ले रहा है जहाँ कोई दिल धड़क
Read Moreरात की काली चादर ओढ़े मुंह को लपेटे सोई है कब से रूठ के सब से सुबह की गोरी आँख
Read Moreमुझसे पहली-सी मुहब्बत मिरे महबूब न मांग मैनें समझा था कि तू है तो दरख़शां है हयात तेरा ग़म है
Read Moreकिन लफ़्ज़ों में इतनी कड़वी इतनी कसीली बात लिखूँ शे’र की मैं तहज़ीब बना हूँ या अपने हालात लिखूँ ग़म
Read Moreक्यों मेरा दिल शाद नहीं है क्यों ख़ामोश रहा करता हूं छोड़ो मेरी राम कहानी मैं जैसा भी हूं अच्छा
Read Moreमिरी ज़िन्दगी मिरी मंज़िलें मुझे क़ुर्ब में नहीं, दूर दे मुझे तू दिखा वही रास्ता, जो सफ़र के बाद ग़ुरूर
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