Javed Akhtar – Jidhar jaate hai sab, jaana udhar acha nahi lagta
जिधर जाते हैं सब, जाना उधर अच्छा नहीं लगता मुझे पामाल रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता ग़लत बातों को
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जिधर जाते हैं सब, जाना उधर अच्छा नहीं लगता मुझे पामाल रस्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता ग़लत बातों को
Read Moreकोई ख़याल और कोई भी जज़्बा कोई भी शय हो जाने उसको पहले-पहल आवाज़ मिली थी या उसकी तस्वीर बनी
Read Moreदोसुख़ने में दो कथनों या उक्तियों का एक ही उत्तर होता है। इसका मूल आधार भी शब्द के दो-दो अर्थ
Read Moreबन के पंछी भए बावरे, ऐसी बीन बजाई सांवरे। तार तार की तान निराली, झूम रही सब वन की डाली।
Read Moreटूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते सत्य का संघर्ष सत्ता से न्याय लड़ता निरंकुशता से अंधेरे ने दी
Read Moreकतआत 1 एक अहले-दर्द ने सुनसान जो देखा कफ़स यों कहा आती नहीं अब कयों सदाए-अन्दलीब बाल-ओ-पर दो-चार दिखला कर
Read Moreदेखना किस्मत कि आप अपने पे रशक आ जाये है मैं उसे देखूं, भला कब मुझसे देखा जाये है हाथ
Read Moreदिया है दिल अगर उसको बशर है क्या कहये हुआ रकीब तो हो नामाबर है क्या कहये ये ज़िद कि
Read Moreसादगी पर उस की मर जाने की हसरत दिल में है बस नहीं चलता कि फिर ख़ंजर कफ़-ए-कातिल में है
Read Moreअजब निशात से जल्लाद के चले हैं हम आगे कि अपने साए से सर पांव से है दो कदम आगे
Read Moreउस बज़म में मुझे नहीं बनती हया किये बैठा रहा अगरचे इशारे हुआ किये दिल ही तो है सियासत-ए-दरबां से
Read Moreइशक मुझको नहीं, वहशत ही सही मेरी वहशत, तेरी शोहरत ही सही कतय कीजे न तअल्लुक हम से कुछ नहीं
Read Moreशिकवे के नाम से बे-मेहर ख़फ़ा होता है ये भी मत कह कि जो कहये तो गिला होता है पुर
Read Moreरुबाईयां 1 आतिशबाज़ी है जैसे शग़ले-अतफ़ाल है सोज़े-ज़िगर का भी इसी तौर का हाल था मूजीदे-इशक भी क्यामत कोई लड़कों
Read Moreकभी नेकी भी उसके जी में आ जाये है मुझ से जफ़ायें करके अपनी याद शरमा जाये है मुझ से
Read Moreहम पर जफ़ा से तरक-ए-वफ़ा का गुमां नहीं इक छेड़ है, वगरना मुराद इमतहां नहीं किस मुंह से शुक्र कीजिए
Read Moreज़ख़्म पर छिड़कें कहां तिफ़लान-ए-बेपरवा नमक क्या मज़ा होता अगर पत्थर में भी होता नमक गरद-ए-राह-ए-यार है सामान-ए-नाज़-ए-ज़ख़्म-ए-दिल वरना होता
Read Moreफिर इस अन्दाज़ से बहार आई कि हुए मेहरो-मह तमाशाई देखो ऐ साकिनान-ए-ख़ित्ता-ए-ख़ाक इसको कहते हैं आलम-आराई कि ज़मीं हो
Read Moreआबरू क्या ख़ाक उस गुल की कि गुलशन में नहीं है गरेबां नंग-ए-पैराहन जो दामन में नहीं ज़ोफ़ से ऐ
Read Moreलाज़िम था कि देखो मेरा रसता कोई दिन और तनहा गये कयों ? अब रहो तनहा कोई दिन और मिट
Read Moreकब वो सुनता है कहानी मेरी और फिर वो भी ज़बानी मेरी ख़लिश-ए-ग़मज़ा-ए-खूंरेज़ न पूछ देख ख़ून्नाबा-फ़िशानी मेरी क्या बयां
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